Three Talaq Law पर बड़ी मांग: BJP नेता जीशान ने PM मोदी से किया संशोधन का आग्रह

जीशान हैदर
शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

भारत में Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Act, 2019 को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम माना गया। लेकिन कानून लागू होने के कुछ साल बाद अब शिया मुस्लिम समुदाय से एक अहम सवाल उठ रहा है “जिस प्रथा का हमारे समाज में अस्तित्व ही नहीं, उसी के लिए हम दंडित क्यों हों?”

PM मोदी से लेकर अमित शाह तक भेजा गया संदेश

लखनऊ के BJP नेता जीशान हैदर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को अलग-अलग पत्र लिखकर Three Talaq Law में संशोधन की मांग की है।

उनका तर्क सीधा है तलाक-ए-बिद्दत (Instant Triple Talaq) शिया इस्लामिक फिक़्ह में मान्य ही नहीं है, फिर भी कानून की धाराएँ शिया समुदाय पर भी समान रूप से लागू हो रही हैं।

कानून एक, पर परंपराएं अलग

शिया और सुन्नी मुस्लिमों की वैवाहिक परंपराओं में मूलभूत अंतर है। जहां सुन्नी समाज में तलाक़-ए-बिद्दत की ऐतिहासिक प्रथा रही है, वहीं शिया समुदाय में तलाक़ एक प्रक्रियात्मक और समयबद्ध धार्मिक व्यवस्था है। यहीं से समस्या शुरू होती है। कानून intention से सही, लेकिन implementation में blanket approach अपनाता दिख रहा है।

सवाल ज़रूरी

यह वही स्थिति है जैसे स्पीड ब्रेकर उस सड़क पर लगा दिया जाए, जहां सड़क ही नहीं है!

शिया समाज का कहना है कि “हम उस अपराध के आरोपी बना दिए गए हैं, जो हमने सीखा ही नहीं।”

यह कोई राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि constitutional clarity की मांग है।

समाधान क्या हो सकता है?

जीशान हैदर ने सुझाव दिया है कि कानून में Shia Muslim Practices को लेकर स्पष्ट क्लॉज जोड़ा जाए। या आधिकारिक clarificatory amendment जारी हो। शिया धार्मिक विद्वानों और विधि विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाए। ताकि कानून न्यायसंगत भी रहे और धार्मिक विविधता का सम्मान भी करे

यानी controversy नहीं, clarity की मांग

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